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फतै पाई
जंगा धकाई पातसाही फौजां,
उग्र ताईं पीढी पिढी दिखाई आरोड ।
चित ऊँचे क्रीत जादां लेण वाली राव चांपा,
रीत बाप दादां वाली ना चूको राठौड ॥
भंडा
जोधांनैसरा मुकटां मणी बाध भूरा,
पगां गलां खतंगी रीधु रा सिधां पार ।
साहसीक जाडे भाग जाणीयों जिहान सिंभू,
आडै अंक मारू चंपै आंणियों आभार ॥
नवा कोटां
नाथरा सुभदा छोटा आप नांमी,
वांमी बंध लाखां पात आथरा बरीस ।
ठिकाणै पाटवी चांपा पाथरा प्रवाड ठावौ,
धरा चापो दानी कहा तरां सुरां धींस ॥
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